लक्ष्य एवं दूरदर्शिता

नगर एवं ग्राम नियोजन एक कला, एक तकनीक है, जो मानव रिश्तों और मानव की गतिविधियों का विश्लेषण करता है और समाज और लोगों के बीच एक संबंध स्थापित करता है। यह अब पूर्ण रूप से विज्ञान के दृष्टिकोण से काम करेगा और नगर एवं ग्राम में भूमि के तर्कसंगत इस्तेमाल, लोगों और सामग्री का उपयुक्त परिसंचरण, आवास के प्रावधान के साथ सामाजिक सुविधाएं और सेवाएं और सामुदायिक सुविधाएं और साथ ही एक व्यापक विकास योजना के ढांचे के अंदर सभी का संश्लेषण करना।

इसलिए नगर एवं ग्राम नियोजन, एक बहुआयामी विषय है जिसमें विभिन्न रुचि और व्यवसायों जैसे इंजीनियरिंग, वास्तुकला, अर्थशास्त्र, समाज-शास्त्र, भूगोल, कानून और प्रशासन एक साथ मानव समस्याओं के समाधान हेतु कार्य करते हैं। नगर एवं ग्राम नियोजक एक सुव्यवस्थित और एकीकृत विकास प्राप्त करने के प्रयास हेतु सर्वेक्षण और अध्ययन, विभिन्न विकासशील योजनाओं का सृजन और उन्हें सही दिशा में कार्यान्वित करने की योजना बनाई गई है। नियोजक का कार्य पूर्ण रूप से सामाजिक प्रक्रियाओं और प्रभावी योजना को ध्यान में रखते हुए और जनता की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। इसलिए नगर एवं ग्राम नियोजन एक नियंत्रित और नियमित कार्यप्रणाली को अपना रहा है।

नगर एवं ग्राम नियोजन को अगर संक्षिप्त में समझना हो तो यह कहना सही होगा की यह भूमि के सही विकास हेतु अलग-अलग योजनाएं और दावे नहीं करती है बल्कि सभी विभिन्न योजनाओं और दावों को समीकृत कर उसके विकास हेतु योजनाओं का निर्माण करता है। साथ ही योजनाओं पर अमल करने के लिए संभावित आर्थिक विकास और सुंदरीकरण पर भी कार्य किया जाएगा और इस पर काम करने के लिए बने प्रावधानों पर भी अमल किया जाएगा।